जैन लड़कियां और अन्य धर्मों में विवाह (Jain Girls & Inter Religious Jain Marriages)

                                                                                                एक काल्पनिक कथा: 

एक 35 साल के लड़के (जिस परिवार में नियमित मांस और शराब का सेवन होता था) ने एक 26 साल की जैन लड़की को फंसा लिया और दोनों घर से भाग कर जाने के लिए रेलवे स्टेशन जा रहे थे| पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया और दोनों के परिवार वालो को थाने बुला लिया| थाने में दोनों परिवारों ने बहुत हंगामा किया| थानेदार समझदार था उसने दोनों परिवारों को समझा-बुझाकर घर भेज दिया और सुबह आने को कहा|

रात में थानेदार ने जैन लड़की को अपने कमरे में बुलाया और समझाया लेकिन लड़की किसी भी हालत में उस लड़के से अलग होने को तैयार नहीं थी| तब थानेदार ने कहा, ठीक है सुबह हम तुझे उस लड़के के साथ भेज देंगे लेकिन आज तुम हमारे और अपने होने वाले पति के लिए अपने हाथ से भोजन बना के हम सब को खिलाओगी| लड़की ख़ुशी-ख़ुशी यह बात मान गई!  

थानेदार ने हवलदार को बुलाया और कुछ जरुरी सामान की लिस्ट देकर खाने का सामान लाने ले लिए भेज दिया| जब सामान आ गया तो थानेदार ने लड़की से कहा की रसोई में सामान आ गया है तुम भोजन बनाओ| जैन लड़की जैसे ही रसोई में गई उसकी चीख निकल गयी और वो उल्टियाँ करती हुई बाहर भाग आई! थानेदार ने आश्चर्यचकित मुद्रा में पूछा क्या हुआ बेटी? 

लड़की उल्टियाँ करती हुई बोली वहाँ इतना खून, किसी जानवर का गर्दन से कटा हुआ सर और मांस पड़ा हुआ है... मैं वहाँ एक पल नहीं ठहर सकती .. थानेदार बोला बेटी २ मिनट में ही घबरा गई? अब तुम जिसके साथ शादी करने के लिए सोच रही हो वहां तो तुझे जिन्दगी भर यही सब देखना और करना होगा और साथ में  ढेरों बच्चे भी पैदा करके उनकी देखभाल भी करनी होगी! क्या तुम इस सब के लिए तैयार हो? 

अगले दिन सुबह होने से पहले ही लड़की अपने मॉ बाप के घर जाने की जिद् करने लगी| 

इस कहानी को कृपया जैन समाज में इतना फैलाओ की प्रत्येक जैन लड़की तक यह कहानी एवं उसका सार पहुंचे और भविष्य में कोई भी जैन लड़की किसी भी अजैन लड़के (विशेषकर जहां मांस और शराब का सेवन होता है) के साथ विवाह न करे| केवल जैन युवक के साथ ही वैवाहिक संबंध करे| साथ में यह युवक एवं उसका परिवार मूल रूप से जैन सिद्धांतों का पालन करता हो यानी कर्म से जैन हो मात्र कुल या सरनेम से नहीं|


भवदीय|

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