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Showing posts from January 10, 2026

आओ पक्षियों से कुछ सीखें

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१. रात को कुछ नही खाते।🦜 २. रात को घूमते नही।🦜 ३. अपने बच्चे को सही समय पर सिखाते हैं।🦜 ४. ठूस ठूस के कभी नही खाते। आप ने कितने भी दाने डाले हों, थोड़ा खा के उड़ जायेंगे। साथ कुछ नही ले जाते।🦜 ५. रात होते ही सो जायेंगे, सुबह जल्दी जाग जायेंगे, गाते चहकते उठेंगे।🦜 ६. अपना आहार कभी नहीं बदलते।🦜 ८. अपने शरीर से सतत् काम लेते हैं। रात के सिवा आराम नही।🦜 ९. बीमारी आई तो खाना छोड़ देंगे, तभी खायेंगे जब ठीक होंगे।🦜 १०. अपने बच्चे को भरपूर प्यार देंगे।🦜 ११. परिश्रम करने से हृदय, किडनी, लिवर के रोग नहीं होते।🦜 १२. प्रकृति से उतना ही लेते हैं जितनी जरूरत है।🦜 १३. अपना घर पर्यावरण अनुकूल बनाते हैं।🦜 १४. अपनी भाषा छोड़कर दूसरों की बोली नहीं बोलते।🦜 *बहुत ही शिक्षाप्रद !* *हम भी इनसे कुछ सीखें तो जीवन सरल, सुंदर व सफल हो जाए*

क्या ये ही जिन्दगी है ?

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जीवन के *23* साल हवा की तरह उड़ गए । फिर शुरू हुई *नोकरी* की खोज । ये नहीं वो, दूर नहीं पास । ऐसा करते करते *2 .. 3* नौकरियाँ छोड़ने एक तय हुई। थोड़ी स्थिरता की शुरुआत हुई। फिर हाथ आई पहली तनख्वाह । वह *बैंक* में जमा हई और शुरू हुआ अकाउंट में जमा होने वाले *शून्यों* का अंतहीन खेल। *2- 3* वर्ष और निकल गए। बैंक में थोड़े और *शून्य* बढ़ गए। उम्र *27* हो गयी। और फिर *विवाह* हो गया। जीवन की *राम कहानी* शुरू हो गयी। शुरू के *2 ..  4* साल नर्म , गुलाबी, रसीले , सुनहरे गुजरे। हाथों में हाथ डालकर घूमना फिरना, रंग बिरंगे सपने। *पर ये दिन जल्दी ही उड़ गए*। और फिर *बच्चे* के आने ही आहट हुई। वर्ष भर में *पालना* झूलने लगा। अब दोनों का सारा ध्यान बच्चे पर केन्द्रित हो गया। उठना - बैठना, खाना - पीना, लाड़ - दुलार । समय कैसे फटाफट निकल गया, पता ही नहीं चला। *इस बीच कब मेरा हाथ उसके हाथ से निकल गया, बाते- करना घूमना - फिरना कब बंद हो गया दोनों को पता ही न चला*। बच्चे* बड़े होते गये । वो *बच्चों* में व्यस्त हो गयी, मैं अपने *काम* में । घर और गाड़ी की *क़िस्त*, बच्चों की जिम्मेदारी, शिक्षा और भविष्य क...

पाप ले लो पुण्य दे दो।

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किसी आश्रम में एक साधु रहता था। काफी सालों से वह इसी आश्रम में रह रहा था। अब वह  काफी वृद्ध हो चला  था और  मृत्यु को वह  निकट महसूस कर रहा था , लेकिन संतुष्ट था कि 30 साल से उसने  प्रभु का सिमरन किया है, उसके खाते में ढेर सारा पुण्य जमा है इसलिए उसे मोक्ष मिलना तो तय ही है।  एक दिन उसके ख्याल  में एक स्त्री आयी। स्त्री ने साधु से कहा -  "अपने एक दिन के पुण्य मुझे दे दो और मेरे एक दिन के पाप तुम वरण कर लो।"  इतना कह कर स्त्री लोप  हो गयी।  साधु बहुत बेचैन हुआ कि इतने बरस तो स्त्री ख्याल में ना आयी, अब जब अंत नजदीक है तो स्त्री ख्याल में आने लगी।   फिर उसने ख्याल झटक दिया और प्रभु सुमिरन में बैठ गया।  स्त्री फिर से ख्याल में आयी। फिर से उसने कहा कि  "एक दिन का पुण्य मुझे  दे दो और मेरा एक दिन का पाप तुम वरण कर लो।" इस बार साधु ने स्त्री को पहचानने की कोशिश की लेकिन स्त्री का चेहरा बहुत धुंधला था, साधु से पहचाना नहीं गया! साधु अब चिंतित हो उठा कि एक दिन का पुण्य लेकर यह स्त्री क्या करेगी! हो ना हो ये स्त्री कष्ट में...

परमात्मा प्राप्ति किसे होती है?

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एक राजा था। वह बहुत न्याय प्रिय तथा प्रजा वत्सल एवं धार्मिक स्वभाव का था। वह नित्य अपने इष्ट देव को बडी श्रद्धा से पूजा-पाठ और याद करता था। एक दिन इष्ट देव ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिये तथा कहा- "राजन् मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूं। बोलो तुम्हारी  कोई इचछा है?" प्रजा को चाहने वाला राजा बोला- "भगवन् मेरे पास आपका दिया सब कुछ है। आपकी कृपा से राज्य में सब प्रकार सुख-शान्ति है। फिर भी मेरी एक इच्छा है कि जैसे आपने मुझे दर्शन देकर धन्य किया, वैसे ही मेरी सारी प्रजा को भी दर्शन दीजिये।" "यह तो सम्भव नहीं  है।" भगवान ने राजा को समझाया, परन्तु प्रजा को चाहने वाला राजा भगवान् से ज़िद्द करने लगा। आखिर भगवान को अपने साधक के सामने झुकना पड़ा और वे बोले- "ठीक है, कल अपनी सारी प्रजा को उस पहाड़ी के पास लाना। मैं पहाड़ी के ऊपर से दर्शन दूँगा।" राजा अत्यन्त प्रसन्न हुईं और भगवान को धन्यवाद दिया। अगले दिन सारे नगर मे ढिंढोरा पिटवा दिया कि कल सभी पहाड़ के नीचे मेरे साथ पहुँचें, वहाँ भगवान् आप सबको दर्शन देंगे । दूसरे दिन राजा अपने समस्त प्रजा और स्वजनों को साथ लेकर...

ये तड़क ये भड़क, कयूं कर रहे हो शादी? कभी पूछा अपने मन से?

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इस विषय पर बहुत कहा जा चुका है, पर व्यक्ति समझ नहीं पा रहा है, लड़का हो या लड़की, या उनके माता-पिता। इन्हीं के चारों तरफ़ ये शादी की कहानी घूमती है। हम देख रहे हैं लव मैरिज करो या रिलेशनसिप में रहो फिर भी शादी टूट जाती है। आख़िर क्यों व्यक्ति की संवेदनाएँ समाप्त हो गई हैं एक दूसरे के प्रति जबकि संवेदनाओं के बिना रिश्ते नहीं चलते हैं। शादी करने से पहले समझें सामने वाले को। किसी के दबाव में आके कभी शादी नहीं करो, जो बाद में इतना भयानक अंजाम न हो जिससे आत्मा कराह उठे, एक पल तो ठहर कर सोचो हमें क्या चाहिए? सच पूछो तो आज वासना अय्याशी इतनी हावी हो गई है और साथ में धन का लालच, जो प्रकृति के विरूद्ध कार्य हो रहे हैं, कहीं लड़की को मार दिया जा रहा है कहीं लड़के को, मतलब तुम्हारी अय्याशी में जो भी ख़लल डालेगा उसी को मौत के घाट उतार दो, क्या उससे जीवन सुख शांति से व्यतीत होगा? एक ग़लत निर्णय से दो परिवारों का जीवन नरक मय हो जाता है। आज लड़कियाँ स्वतंत्र होकर पढ़ लिख कर पैसा कमा रहा ही हैं पर उसका दुरुपयोग क्यों ? लड़कियों को सफल बनाने के लिए पढ़ाई पर ज़ोर दिया गया था, क्या यही सफल होना है, घर को...