ये तड़क ये भड़क, कयूं कर रहे हो शादी? कभी पूछा अपने मन से?
इस विषय पर बहुत कहा जा चुका है, पर व्यक्ति समझ नहीं पा रहा है, लड़का हो या लड़की, या उनके माता-पिता। इन्हीं के चारों तरफ़ ये शादी की कहानी घूमती है। हम देख रहे हैं लव मैरिज करो या रिलेशनसिप में रहो फिर भी शादी टूट जाती है। आख़िर क्यों व्यक्ति की संवेदनाएँ समाप्त हो गई हैं एक दूसरे के प्रति जबकि संवेदनाओं के बिना रिश्ते नहीं चलते हैं।
शादी करने से पहले समझें सामने वाले को। किसी के दबाव में आके कभी शादी नहीं करो, जो बाद में इतना भयानक अंजाम न हो जिससे आत्मा कराह उठे, एक पल तो ठहर कर सोचो हमें क्या चाहिए?
सच पूछो तो आज वासना अय्याशी इतनी हावी हो गई है और साथ में धन का लालच, जो प्रकृति के विरूद्ध कार्य हो रहे हैं, कहीं लड़की को मार दिया जा रहा है कहीं लड़के को, मतलब तुम्हारी अय्याशी में जो भी ख़लल डालेगा उसी को मौत के घाट उतार दो, क्या उससे जीवन सुख शांति से व्यतीत होगा?
एक ग़लत निर्णय से दो परिवारों का जीवन नरक मय हो जाता है। आज लड़कियाँ स्वतंत्र होकर पढ़ लिख कर पैसा कमा रहा ही हैं पर उसका दुरुपयोग क्यों ? लड़कियों को सफल बनाने के लिए पढ़ाई पर ज़ोर दिया गया था, क्या यही सफल होना है, घर को नरक बना दो?
शादी से पहले सोचो क्या अपेक्षायें हैं लड़के से और लड़की से, हम ऐसा जीवन साथी चाहते हैं। कहीं कहीं माता पिता के दबाव में आ कर निर्णय कर लेते हैं, फिर बाद में अपना और सबों का जीवन नर्क बना देते हैं। एक दूसरे को मारते समय आत्मा नहीं काँपती?
अपराध करके क्या तुमने सुख प्राप्त कर लिया?
क्या पकड़े नहीं जाओगे?
इतनी बदनामी होती है! एक दूसरे पर से विश्वास ख़त्म होते जा रहा है?
समस्याएँ होती हैं तो समाधान भी होता है, अपना दिमाग़ काम नहीं करता तो अच्छे सलाहकार से सलाह लो, तब जीवन को संवारो, बहुत कुछ कहा जा सकता है पर आज इतना ही।
लेखिका: सुरेखा जैन
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