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जैन समुदाय की तरक्की का भारत देश के लिये योगदान

 कम हैं लेकिन दम हैं! जैन समुदाय की तरक्की का भारत देश के लिये योगदान !!  भारत में जैन समुदाय बहुत छोटा समुदाय है। भारत की कुल आबादी में जैन लोगों की संख्या एक या दो परसेंट भी नहीं है। लेकिन उनकी संख्या के मुकाबले उनका योगदान बहुत बड़ा है।  👉 जैन समुदाय के कुछ मशहूर लोगों की लिस्ट नीचे दी गई है, जिससे अलग-अलग फील्ड में उनके योगदान को देखा जा सकेगा,आपके पास और कुछ नाम रहेंगे कमेंट करे 🌷 🌷 कर्मवीर भाऊराव पाटील (जैन), जिन्होंने रयत शिक्षण संस्था के माध्यम से पश्चिमी महाराष्ट्र के आम लोगों तक शिक्षा की गंगा पहुंचाई, आज महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा स्कूल रयत के ही हैं। 🌷 प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, आर्टिस्ट वी. शांताराम, जिन्होंने मराठी और हिंदी सिनेमा में सुनहरा दौर लाया। 🌷  प्रेमचंद रॉयचंद, जिन्होंने एशिया में पहला स्टॉक एक्सचेंज शुरू किया, शेअर मार्केट के जनक। 🌷 डॉ. विक्रम साराभाई (जिन्हें भारत के स्पेस प्रोग्राम का जनक कहा जाता है)। 🌷 अनुसया साराभाई, जिन्होंने भारत में टेक्सटाइल मिल वर्कर्स की पहली यूनियन बनाई। 🌷 श्रीमद राजचंद्र, जिन्होंने गांधी को ईसाई बनने से रोका ...

भविष्य की एक ज्वलंत सामाजिक समस्या: पीढ़ी में होगी गिरावट

   भविष्य की एक ज्वलंत समस्या  👉🏿   जब बच्चों का विवाह     20 साल में होता था, तो     एक सदी में 5 पीढ़ियाँ होती थीं. 👉🏿 जब बच्चों का विवाह      25 साल में होता था, तो      एक सदी में 4 पीढ़ियाँ होती थीं. 👉🏿 अब बच्चों का विवाह     30 साल में होता है, तो     एक सदी में 3 पीढ़ियाँ होती हैं. 👉🏿  सोचने वाली बात है.         क्या हमारा समाज  अगली सदी तक जीवित रहेगा ?      आज एक अजीब सा         अंधेरा फैल रहा है. 🏚️    गली-मोहल्ले वीरान हैं, आस-पास के घर खाली हैं. आज घरों में बच्चों की आवाज कम  पति-पत्नी की आवाज ज्यादा सुनाई देती है. ★  लड़कियाँ 30-35 साल तक कुंवारी हैं. ★  लड़के 35 साल के बाद भी           कुँवारें घूम रहे हैं. ★  देर से शादी ...    फिर सम्बंध विच्छेद (तलाक)          टूटते परिवार  ...    ...

आने वाला समय कुवांरेपन का युग होगा?

 एक हालिया अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार अगले छ:वर्षो में विश्व की लगभग 45% लड़कियां अविवाहित रह जाएंगी। यह रिपोर्ट 1 फरवरी 2025 को प्रकाशित लोकमत अखबार में छपी थी, जो मार्गन स्टेनली संस्था द्वारा किए गए एक विस्तृत अध्धयन पर आधारित हैं।। सर्वेक्षण में पाये गए प्रमुख कारण:- १.आज की लड़कियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही है और करियर को प्राथमिकता दे रही हैं। २.वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है और किसी पर निर्भर रहना नहीं चाहती। ३.उन्हें स्वतंत्रता प्रिय है और वे अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेना चाहती हैं। ४.विवाह, मातृत्व और पारिवारिक बंधनों को वे अक्सर अपनी प्रगति में बाधा मानने लगी हैं। ५.यदि यह प्रवृति बनी रही तो पारंपरिक परिवार प्रणाली और सामाजिक संरचना बिखर सकती हैं। ६.जनसंख्या में गिरावट, कुंवारे लड़कों की संख्या में वृद्धि और वृद्धावस्था में अकेलेपन की समस्याएँ सामने आ सकती हैं। ७.प्रश्न यह भी उठता है प्रगति, पद और पैसा किस काम आएंगे, जब जीवन के अंत में साथ देने वाला कोई न होगा? * कई माता पिता लड़कियों के रिश्ते तो ढूंढ रहे हैं, पर स्वयं लड़की को विवाह में रूचि नहीं होती।जिसके कारण हर ...

जागो जैन दानवीरों, जागो।

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 *जैन समाज के सभी दानवीरों को जय जिनेन्द्र…* ✒️✒️✒️ *यह संदेश आप सभी के लिए एक *रेड अलर्ट है…** *जागो जैन दानवीरों, जागो।* ₹1000 से लेकर ₹10 करोड़ तक की बोली बोलने वाले सभी जैन भाइयों से विनम्र निवेदन है—बहुत गहराई से सोचिए और विवेक के साथ निर्णय लीजिए। यदि यही धन जैन युवाओं को *बिना ब्याज के ऋण* के रूप में देकर वापस लिया जाए, तो पूरा परिवार सम्मानपूर्वक आगे बढ़ सकता है। या फिर *जैन कॉलोनी* बनाकर साधार्मिक परिवारों को एक कमरा-रसोई उपलब्ध कराइए, या *जैन वाड़ी, **जैन अस्पताल* बनवाइए—पुण्य निश्चित रूप से मिलेगा। आज हमारे समाज में लगभग *60% लोग मध्यम या कमजोर आर्थिक स्थिति* में हैं। यदि समाज को समुद्र बनाना है, तो *साधारण साधार्मिक का हाथ पकड़ना ही पड़ेगा*। आज *लाखों जैन युवा* अपने परिवार को आगे बढ़ाने और पढ़ाई के लिए किसी सहारे का हाथ थामने की प्रतीक्षा में खड़े हैं। आज *हज़ारों बहनें-माताएँ* हैं जो खाखरा-पापड़ बनाकर, फेरी लगाकर, या कठोर मजदूरी करके अपना जीवन चला रही हैं। आज की परिस्थितियों में *साधु-संतों में जागरूकता की आवश्यकता है*। आप जैसे समझदार लोगों को अधिक समझाने की आवश्यकता न...

यह परिवर्तन

  मैं जितने साल जी चुका हूँ, उससे अब कम साल मुझे जीना है। यह समझ आने के बाद मुझमें यह परिवर्तन आया है : १. किसी प्रियजन की विदाई से अब मैं रोना छोड़ चुका हूँ क्योंकि आज नहीं तो कल मेरी बारी है। २. उसी प्रकार,अगर मेरी विदाई अचानक हो जाती है, तो मेरे बाद लोगों का क्या होगा, यह सोचना भी छोड़ दिया है क्योंकि मेरे जाने के बाद कोई भूखा नहीं रहेगा और मेरी संपत्ति को कोई छोड़ने या दान करने की ज़रूरत नहीं है। ३. सामने वाले व्यक्ति के पैसे, पावर और पोजीशन से अब मैं डरता नहीं हूँ। ४. खुद के लिए सबसे अधिक समय निकालता हूँ। मान लिया है कि दुनिया मेरे कंधों पर टिकी नहीं है। मेरे बिना कुछ रुकने वाला नहीं है। ५. छोटे व्यापारियों और फेरीवालों के साथ मोल-भाव करना बंद कर दिया है। कभी-कभी जानता हूँ कि मैं ठगा जा रहा हूँ, फिर भी हँसते-मुस्कुराते चला जाता हूँ। ६. कबाड़ उठाने वालों को फटी या खाली तेल की डिब्बी वैसे ही दे देता हूँ, पच्चीस-पचास रुपये खर्च करता हूँl जब उनके चेहरे पर लाखों मिलने की खुशी देखता हूँ तो खुश हो जाता हूँ। ७. सड़क पर व्यापार करने वालों से कभी-कभी बेकार की चीज़ भी खरीद लेता हूँ। ८. ब...

आओ पक्षियों से कुछ सीखें

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१. रात को कुछ नही खाते।🦜 २. रात को घूमते नही।🦜 ३. अपने बच्चे को सही समय पर सिखाते हैं।🦜 ४. ठूस ठूस के कभी नही खाते। आप ने कितने भी दाने डाले हों, थोड़ा खा के उड़ जायेंगे। साथ कुछ नही ले जाते।🦜 ५. रात होते ही सो जायेंगे, सुबह जल्दी जाग जायेंगे, गाते चहकते उठेंगे।🦜 ६. अपना आहार कभी नहीं बदलते।🦜 ८. अपने शरीर से सतत् काम लेते हैं। रात के सिवा आराम नही।🦜 ९. बीमारी आई तो खाना छोड़ देंगे, तभी खायेंगे जब ठीक होंगे।🦜 १०. अपने बच्चे को भरपूर प्यार देंगे।🦜 ११. परिश्रम करने से हृदय, किडनी, लिवर के रोग नहीं होते।🦜 १२. प्रकृति से उतना ही लेते हैं जितनी जरूरत है।🦜 १३. अपना घर पर्यावरण अनुकूल बनाते हैं।🦜 १४. अपनी भाषा छोड़कर दूसरों की बोली नहीं बोलते।🦜 *बहुत ही शिक्षाप्रद !* *हम भी इनसे कुछ सीखें तो जीवन सरल, सुंदर व सफल हो जाए*

क्या ये ही जिन्दगी है ?

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जीवन के *23* साल हवा की तरह उड़ गए । फिर शुरू हुई *नोकरी* की खोज । ये नहीं वो, दूर नहीं पास । ऐसा करते करते *2 .. 3* नौकरियाँ छोड़ने एक तय हुई। थोड़ी स्थिरता की शुरुआत हुई। फिर हाथ आई पहली तनख्वाह । वह *बैंक* में जमा हई और शुरू हुआ अकाउंट में जमा होने वाले *शून्यों* का अंतहीन खेल। *2- 3* वर्ष और निकल गए। बैंक में थोड़े और *शून्य* बढ़ गए। उम्र *27* हो गयी। और फिर *विवाह* हो गया। जीवन की *राम कहानी* शुरू हो गयी। शुरू के *2 ..  4* साल नर्म , गुलाबी, रसीले , सुनहरे गुजरे। हाथों में हाथ डालकर घूमना फिरना, रंग बिरंगे सपने। *पर ये दिन जल्दी ही उड़ गए*। और फिर *बच्चे* के आने ही आहट हुई। वर्ष भर में *पालना* झूलने लगा। अब दोनों का सारा ध्यान बच्चे पर केन्द्रित हो गया। उठना - बैठना, खाना - पीना, लाड़ - दुलार । समय कैसे फटाफट निकल गया, पता ही नहीं चला। *इस बीच कब मेरा हाथ उसके हाथ से निकल गया, बाते- करना घूमना - फिरना कब बंद हो गया दोनों को पता ही न चला*। बच्चे* बड़े होते गये । वो *बच्चों* में व्यस्त हो गयी, मैं अपने *काम* में । घर और गाड़ी की *क़िस्त*, बच्चों की जिम्मेदारी, शिक्षा और भविष्य क...

पाप ले लो पुण्य दे दो।

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किसी आश्रम में एक साधु रहता था। काफी सालों से वह इसी आश्रम में रह रहा था। अब वह  काफी वृद्ध हो चला  था और  मृत्यु को वह  निकट महसूस कर रहा था , लेकिन संतुष्ट था कि 30 साल से उसने  प्रभु का सिमरन किया है, उसके खाते में ढेर सारा पुण्य जमा है इसलिए उसे मोक्ष मिलना तो तय ही है।  एक दिन उसके ख्याल  में एक स्त्री आयी। स्त्री ने साधु से कहा -  "अपने एक दिन के पुण्य मुझे दे दो और मेरे एक दिन के पाप तुम वरण कर लो।"  इतना कह कर स्त्री लोप  हो गयी।  साधु बहुत बेचैन हुआ कि इतने बरस तो स्त्री ख्याल में ना आयी, अब जब अंत नजदीक है तो स्त्री ख्याल में आने लगी।   फिर उसने ख्याल झटक दिया और प्रभु सुमिरन में बैठ गया।  स्त्री फिर से ख्याल में आयी। फिर से उसने कहा कि  "एक दिन का पुण्य मुझे  दे दो और मेरा एक दिन का पाप तुम वरण कर लो।" इस बार साधु ने स्त्री को पहचानने की कोशिश की लेकिन स्त्री का चेहरा बहुत धुंधला था, साधु से पहचाना नहीं गया! साधु अब चिंतित हो उठा कि एक दिन का पुण्य लेकर यह स्त्री क्या करेगी! हो ना हो ये स्त्री कष्ट में...

परमात्मा प्राप्ति किसे होती है?

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एक राजा था। वह बहुत न्याय प्रिय तथा प्रजा वत्सल एवं धार्मिक स्वभाव का था। वह नित्य अपने इष्ट देव को बडी श्रद्धा से पूजा-पाठ और याद करता था। एक दिन इष्ट देव ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिये तथा कहा- "राजन् मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूं। बोलो तुम्हारी  कोई इचछा है?" प्रजा को चाहने वाला राजा बोला- "भगवन् मेरे पास आपका दिया सब कुछ है। आपकी कृपा से राज्य में सब प्रकार सुख-शान्ति है। फिर भी मेरी एक इच्छा है कि जैसे आपने मुझे दर्शन देकर धन्य किया, वैसे ही मेरी सारी प्रजा को भी दर्शन दीजिये।" "यह तो सम्भव नहीं  है।" भगवान ने राजा को समझाया, परन्तु प्रजा को चाहने वाला राजा भगवान् से ज़िद्द करने लगा। आखिर भगवान को अपने साधक के सामने झुकना पड़ा और वे बोले- "ठीक है, कल अपनी सारी प्रजा को उस पहाड़ी के पास लाना। मैं पहाड़ी के ऊपर से दर्शन दूँगा।" राजा अत्यन्त प्रसन्न हुईं और भगवान को धन्यवाद दिया। अगले दिन सारे नगर मे ढिंढोरा पिटवा दिया कि कल सभी पहाड़ के नीचे मेरे साथ पहुँचें, वहाँ भगवान् आप सबको दर्शन देंगे । दूसरे दिन राजा अपने समस्त प्रजा और स्वजनों को साथ लेकर...

ये तड़क ये भड़क, कयूं कर रहे हो शादी? कभी पूछा अपने मन से?

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इस विषय पर बहुत कहा जा चुका है, पर व्यक्ति समझ नहीं पा रहा है, लड़का हो या लड़की, या उनके माता-पिता। इन्हीं के चारों तरफ़ ये शादी की कहानी घूमती है। हम देख रहे हैं लव मैरिज करो या रिलेशनसिप में रहो फिर भी शादी टूट जाती है। आख़िर क्यों व्यक्ति की संवेदनाएँ समाप्त हो गई हैं एक दूसरे के प्रति जबकि संवेदनाओं के बिना रिश्ते नहीं चलते हैं। शादी करने से पहले समझें सामने वाले को। किसी के दबाव में आके कभी शादी नहीं करो, जो बाद में इतना भयानक अंजाम न हो जिससे आत्मा कराह उठे, एक पल तो ठहर कर सोचो हमें क्या चाहिए? सच पूछो तो आज वासना अय्याशी इतनी हावी हो गई है और साथ में धन का लालच, जो प्रकृति के विरूद्ध कार्य हो रहे हैं, कहीं लड़की को मार दिया जा रहा है कहीं लड़के को, मतलब तुम्हारी अय्याशी में जो भी ख़लल डालेगा उसी को मौत के घाट उतार दो, क्या उससे जीवन सुख शांति से व्यतीत होगा? एक ग़लत निर्णय से दो परिवारों का जीवन नरक मय हो जाता है। आज लड़कियाँ स्वतंत्र होकर पढ़ लिख कर पैसा कमा रहा ही हैं पर उसका दुरुपयोग क्यों ? लड़कियों को सफल बनाने के लिए पढ़ाई पर ज़ोर दिया गया था, क्या यही सफल होना है, घर को...