जागो जैन दानवीरों, जागो।
*जैन समाज के सभी दानवीरों को जय जिनेन्द्र…*
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*यह संदेश आप सभी के लिए एक *रेड अलर्ट है…**
*जागो जैन दानवीरों, जागो।*
₹1000 से लेकर ₹10 करोड़ तक की बोली बोलने वाले सभी जैन भाइयों से विनम्र निवेदन है—बहुत गहराई से सोचिए और विवेक के साथ निर्णय लीजिए। यदि यही धन जैन युवाओं को *बिना ब्याज के ऋण* के रूप में देकर वापस लिया जाए, तो पूरा परिवार सम्मानपूर्वक आगे बढ़ सकता है।
या फिर *जैन कॉलोनी* बनाकर साधार्मिक परिवारों को एक कमरा-रसोई उपलब्ध कराइए,
या *जैन वाड़ी, **जैन अस्पताल* बनवाइए—पुण्य निश्चित रूप से मिलेगा।
आज हमारे समाज में लगभग *60% लोग मध्यम या कमजोर आर्थिक स्थिति* में हैं।
यदि समाज को समुद्र बनाना है, तो *साधारण साधार्मिक का हाथ पकड़ना ही पड़ेगा*।
आज *लाखों जैन युवा* अपने परिवार को आगे बढ़ाने और पढ़ाई के लिए
किसी सहारे का हाथ थामने की प्रतीक्षा में खड़े हैं।
आज *हज़ारों बहनें-माताएँ* हैं जो खाखरा-पापड़ बनाकर, फेरी लगाकर,
या कठोर मजदूरी करके अपना जीवन चला रही हैं।
आज की परिस्थितियों में *साधु-संतों में जागरूकता की आवश्यकता है*।
आप जैसे समझदार लोगों को अधिक समझाने की आवश्यकता नहीं है,
क्योंकि आप स्वयं बुद्धिमान हैं।
भगवान ने आपको सोच-समझकर ही धन दिया है,
ताकि आप उसका *सदुपयोग करें*,
न कि किसी की होड़ में लाखों-करोड़ों की बोलियाँ लगाएँ।
अपने धन का सदुपयोग करके सबसे पहले *जैन बच्चों को बिना ब्याज का ऋण* दीजिए,
उसे वापस लेकर पूरे परिवार को ऊपर उठाने का महान पुण्य कमाइए।
साथ ही *अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, वृद्धाश्रम, पंजरापोल, औषधालय* जैसी संस्थाओं में
सत्कार्य कर समाज का कल्याण कीजिए।
इतना करेंगे तो *भगवान स्वयं प्रसन्न ही रहेंगे*, मेरे भाई।
अब प्रश्न यह है—
**क्या भविष्य में इतने देरसारों की वास्तव में आवश्यकता है?
इनकी देखभाल कौन करेगा?**
क्या यह सब केवल पुजारियों के लिए है?
कृपया समझदारी से सोचिए।
जो *युवा इस विचारधारा से सहमत हों*,
वे इस पोस्ट को सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाएँ
कि यह संदेश *हर व्यक्ति तक पहुँच जाए*। 🙏
Source: Social Media.

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