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Showing posts from April, 2026

जैन समुदाय की तरक्की का भारत देश के लिये योगदान

 कम हैं लेकिन दम हैं! जैन समुदाय की तरक्की का भारत देश के लिये योगदान !!  भारत में जैन समुदाय बहुत छोटा समुदाय है। भारत की कुल आबादी में जैन लोगों की संख्या एक या दो परसेंट भी नहीं है। लेकिन उनकी संख्या के मुकाबले उनका योगदान बहुत बड़ा है।  👉 जैन समुदाय के कुछ मशहूर लोगों की लिस्ट नीचे दी गई है, जिससे अलग-अलग फील्ड में उनके योगदान को देखा जा सकेगा,आपके पास और कुछ नाम रहेंगे कमेंट करे 🌷 🌷 कर्मवीर भाऊराव पाटील (जैन), जिन्होंने रयत शिक्षण संस्था के माध्यम से पश्चिमी महाराष्ट्र के आम लोगों तक शिक्षा की गंगा पहुंचाई, आज महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा स्कूल रयत के ही हैं। 🌷 प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, आर्टिस्ट वी. शांताराम, जिन्होंने मराठी और हिंदी सिनेमा में सुनहरा दौर लाया। 🌷  प्रेमचंद रॉयचंद, जिन्होंने एशिया में पहला स्टॉक एक्सचेंज शुरू किया, शेअर मार्केट के जनक। 🌷 डॉ. विक्रम साराभाई (जिन्हें भारत के स्पेस प्रोग्राम का जनक कहा जाता है)। 🌷 अनुसया साराभाई, जिन्होंने भारत में टेक्सटाइल मिल वर्कर्स की पहली यूनियन बनाई। 🌷 श्रीमद राजचंद्र, जिन्होंने गांधी को ईसाई बनने से रोका ...

भविष्य की एक ज्वलंत सामाजिक समस्या: पीढ़ी में होगी गिरावट

   भविष्य की एक ज्वलंत समस्या  👉🏿   जब बच्चों का विवाह     20 साल में होता था, तो     एक सदी में 5 पीढ़ियाँ होती थीं. 👉🏿 जब बच्चों का विवाह      25 साल में होता था, तो      एक सदी में 4 पीढ़ियाँ होती थीं. 👉🏿 अब बच्चों का विवाह     30 साल में होता है, तो     एक सदी में 3 पीढ़ियाँ होती हैं. 👉🏿  सोचने वाली बात है.         क्या हमारा समाज  अगली सदी तक जीवित रहेगा ?      आज एक अजीब सा         अंधेरा फैल रहा है. 🏚️    गली-मोहल्ले वीरान हैं, आस-पास के घर खाली हैं. आज घरों में बच्चों की आवाज कम  पति-पत्नी की आवाज ज्यादा सुनाई देती है. ★  लड़कियाँ 30-35 साल तक कुंवारी हैं. ★  लड़के 35 साल के बाद भी           कुँवारें घूम रहे हैं. ★  देर से शादी ...    फिर सम्बंध विच्छेद (तलाक)          टूटते परिवार  ...    ...

आने वाला समय कुवांरेपन का युग होगा?

 एक हालिया अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार अगले छ:वर्षो में विश्व की लगभग 45% लड़कियां अविवाहित रह जाएंगी। यह रिपोर्ट 1 फरवरी 2025 को प्रकाशित लोकमत अखबार में छपी थी, जो मार्गन स्टेनली संस्था द्वारा किए गए एक विस्तृत अध्धयन पर आधारित हैं।। सर्वेक्षण में पाये गए प्रमुख कारण:- १.आज की लड़कियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही है और करियर को प्राथमिकता दे रही हैं। २.वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है और किसी पर निर्भर रहना नहीं चाहती। ३.उन्हें स्वतंत्रता प्रिय है और वे अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेना चाहती हैं। ४.विवाह, मातृत्व और पारिवारिक बंधनों को वे अक्सर अपनी प्रगति में बाधा मानने लगी हैं। ५.यदि यह प्रवृति बनी रही तो पारंपरिक परिवार प्रणाली और सामाजिक संरचना बिखर सकती हैं। ६.जनसंख्या में गिरावट, कुंवारे लड़कों की संख्या में वृद्धि और वृद्धावस्था में अकेलेपन की समस्याएँ सामने आ सकती हैं। ७.प्रश्न यह भी उठता है प्रगति, पद और पैसा किस काम आएंगे, जब जीवन के अंत में साथ देने वाला कोई न होगा? * कई माता पिता लड़कियों के रिश्ते तो ढूंढ रहे हैं, पर स्वयं लड़की को विवाह में रूचि नहीं होती।जिसके कारण हर ...