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Showing posts from September, 2025

भारतीय सकल जैन धर्म की जातियां

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अरसु (कर्णाटक) असाटी अग्रवाल (हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और भारत के अन्य काई राज्य) इंद्र (तटीय कर्णाटक) बंट (तटीय कर्णाटक) बघेरवाल/लाड (राजस्थान, विदर्भ-महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश) बोगार (कर्णाटक) भावसार (गुजरात) भाभडा (पंजाब) भोजक चरनगारे चतुर्थ (कर्णाटक, महाराष्ट्र) चिप्पिगा (कर्णाटक) चित्तौड़ा (राजस्थान) धर्मपाल (राजस्थान, मध्य प्रदेश) धाकड (विदर्भ-महाराष्ट्र) गंगेरवाल (पश्चिम विदर्भ-महाराष्ट्र) गोलसिंघारे (बुंदेलखंड-मध्य प्रदेश) गोलापूर्व (बुंदेलखंड-मध्य प्रदेश) गोलालारे (बुंदेलखंड-मध्य प्रदेश) गुरव (कोंकण-महाराष्ट्र) घांची (गुजरात,राजस्थान) हंबड/हुमड(गुजरात,राजस्थान, महाराष्ट्र) जैन ब्राह्मण(दक्षिण कर्णाटक) जैसवाल कच्छी ओसवाल (कच्छ-गुजरात) कंदोई कासार (महाराष्ट्र) कोष्टी/जैन कोष्टी(विदर्भ-महाराष्ट्र) कांबोज (कर्णाटक, महाराष्ट्र) कुरुबा/कुरुंब (कर्णाटक) खरौआ (भदावर-मध्य प्रदेश) खंडेलवाल (राजस्थान, मध्य प्रदेश) लमेचू (मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश) मेवाडा (राजस्थान) मीणा (राजस्थान) नवनात (केनिया-आफ्रिका, इंग्लंड) नागदा (राजस्थान) नेमा (मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान) नैनार (तमिल नाडु) नाडावर...

जिसकी लाठी उसकी भैंस Might is Right : धार्मिक स्थलों की सुरक्षा

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प्राचीन काल से ही नहीं, बल्कि आज भी का सञ्चालन उक्त युक्ति के आधार पर ही हो रहा है । लेकिन दुर्भाग्य से हम जैनी लोग अभी भी अपने सपनों में ही डुबे हुए हैं !!! हमें आने वाले खतरे नजर नहीं आ रहे हैं ??? गत कुछ माह पूर्व ही वीले पार्ले, मुंबई के जिन-मंदिर को कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा सुनियोजित षड्यंत्र द्वारा अन्यायपूर्ण तरीके से तोड़े जाने एवं 02 जुलाई,2025 को गिरनारजी की सामूहिक यात्रा के समय, हमारा अपना तीर्थ क्षेत्र होने पर भी कितनी प्रतिबंधता एवं कठिनाइयों के बीच हम यात्रा कर सके ???, यह सब इस बात का प्रमाण है कि जब तक हम संगठित होकर अपने अधिकारों के प्रति जागृत नहीं होंगे, तब तक निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा नियोजित षड्यंत्रों द्वारा हमारी कमजोरी का फायदा उठाया जाता रहेगा। तो हमें यह समझना होगा कि प्रश्न चाहे गिरनारजी का हो, या शिखरजी का या पालीताना का ? ? ? अंतरिक्ष पार्श्वनाथ का या कुण्डल का ??? श्वेताम्बर का या दिगंबर का ??? तेरा पंथ का या बीस पंथ का ??? हमें सभी भेद भाव भुलाकर संगठित होकर संकीर्णता छोड़कर अपने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए सजग होना पड़ेगा। धार्मिक स्थल रहेंगे ...

लेख: कर्नाटक एवं महाराष्ट्र के जैन OBC एवं जातिगत जन गणना

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.. 1 ... युवावस्था से ही लगभग 35 वर्षों से सामाजिक कार्यों में रूचि होने के कारण पुणे (महाराष्ट्र) की स्थानीय संस्थाओं के साथ ही राष्ट्रिय संस्थाओं जैसे दिगंबर जैन महासमिति, दिगंबर जैन महासभा, जैन इंजीनियर्स' सोसाइटी आदि में भी सक्रीय रूप से कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । इस समय ऐसा आभास हुआ कि राष्ट्रिय संस्थाओं के सभी, विशेषकर उत्तर भारत के लगभग सभी वरिष्ठ कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों में अनभिज्ञनता के कारण यह धारणा बनी हुई है कि जैन धर्मानुयायी सिर्फ ओसवाल, पोरवाल, खंडेलवाल, अग्रवाल, हुमड़, पोरवाड़, परवार आदि उपजातियों तक ही सिमित हैं । जब कि तथ्य यह है कि जैन धर्म जन्म से नहीं बल्कि कर्म से जुड़ा हुआ है। अतः जो जैन धर्म के सिद्धांतो को मानता है एवं उसके अनुसार आचरण करता है, वही सच्चा जैनी है । इस सिद्धांत के अनुसार दक्षिण भारत विशेषकर महाराष्ट्र एवं कर्नाटक राज्य के कुछ जिलों के सम्पूर्ण गावों के निवासी जैन धर्मानुयायी हैं । लेकिन वे उपरोक्त किसी भी उपजाति से सम्बन्ध नहीं रखते हैं, बल्कि चतुर्थ या पंचम कहलाते हैं । ये सभी अधिकतर कृषि करते हैं या गांव की जरुरत के अनुसार वि...