लेख: कर्नाटक एवं महाराष्ट्र के जैन OBC एवं जातिगत जन गणना
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युवावस्था से ही लगभग 35 वर्षों से सामाजिक कार्यों में रूचि होने के कारण पुणे (महाराष्ट्र) की स्थानीय संस्थाओं के साथ ही राष्ट्रिय संस्थाओं जैसे दिगंबर जैन महासमिति, दिगंबर जैन महासभा, जैन इंजीनियर्स' सोसाइटी आदि में भी सक्रीय रूप से कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । इस समय ऐसा आभास हुआ कि राष्ट्रिय संस्थाओं के सभी, विशेषकर उत्तर भारत के लगभग सभी वरिष्ठ कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों में अनभिज्ञनता के कारण यह धारणा बनी हुई है कि जैन धर्मानुयायी सिर्फ ओसवाल, पोरवाल, खंडेलवाल, अग्रवाल, हुमड़, पोरवाड़, परवार आदि उपजातियों तक ही सिमित हैं । जब कि तथ्य यह है कि जैन धर्म जन्म से नहीं बल्कि कर्म से जुड़ा हुआ है। अतः जो जैन धर्म के सिद्धांतो को मानता है एवं उसके अनुसार आचरण करता है, वही सच्चा जैनी है । इस सिद्धांत के अनुसार दक्षिण भारत विशेषकर महाराष्ट्र एवं कर्नाटक राज्य के कुछ जिलों के सम्पूर्ण गावों के निवासी जैन धर्मानुयायी हैं । लेकिन वे उपरोक्त किसी भी उपजाति से सम्बन्ध नहीं रखते हैं, बल्कि चतुर्थ या पंचम कहलाते हैं । ये सभी अधिकतर कृषि करते हैं या गांव की जरुरत के अनुसार विभिन्न कार्य करते हुए अपनी आजीविका चलाते हैं । लगभग ये सभी वित्तीय रूप से मध्यम या निम्न वर्ग में आते हैं | अतः वित्तीय रूप से कमजोर होने के कारण कर्नाटक एवं महाराष्ट्र सरकार द्वारा इन्हें OBC की श्रेणी में सम्मिलित किया जाकर इन्हें विशेष सुविधाएँ प्रदान की गई हैं ।
उपरोक्त तालिका के अनुसार वर्ष 2011 में संपन्न जन-गणना के आधार पर महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में जैन धर्मावलम्बियों की संख्या काफी अधिक है, एवं लगभग वे सभी OBC की श्रेणी में आते हैं । पिछले कुछ वर्षों में सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है। अब ओबीसी समुदाय के लिए आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं की मांग काफी बढ़ गई है। ऐसे में जातिगत जनगणना की मांग फिर से जोर पकड़ने लगी। अतः अब वर्ष 2025 में केंद्रीय सरकार ने जातिगत जन गणना करने का निर्णय लिया है। यह फैसला सामाजिक-आर्थिक नीतियों को और प्रभावी बनाने के लिए लिया गया है, विशेष रूप से उन समुदायों के लिए जो इससे वंचित रहे हैं। जनगणना, भारत की जनसंख्या का एक व्यापक सर्वेक्षण, 2 चरणों में आयोजित किया जाएगा, पहला चरण अस्थायी रूप से 1 अक्टूबर, 2026 को हिमालयी राज्यों के लिए और 1 मार्च, 2027 को शेष भारत के लिए शुरू होगा। यह भारत में पहली डिजिटल जनगणना होगी और इसमें जातिगत जनगणना शामिल होगी।
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जन-जागरूकता की जरुरत
एक कहावत है कि "जितनी जिसकी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी" । इस सिद्धांत से चूँकि 2011 की जन- गणना में हमारा प्रतिशत 0.41 था, अतः उसके अनुसार हमें उसका 0.41 प्रतिशत ही मिला । इस जन-गणना की एक और विशेषता रहेगी कि यह डिजिटल प्लेटफार्म का उपयोग कर टेबलेट (कंप्यूटर) एवं मोबाइल के माध्यम से की जानी है । तब एक बहुत बड़ा प्रश्न खड़ा होता है कि जैन समाज, विशेष कर जो ग्रामीण भाग में रहता है, वह किस तरह इसका उपयोग कर अपने बारे में एवं अपने धर्म / जाति / उपजाती के बारे में सही जानकारी दे सकेगा ?
हांलाकि जन-गणना का कार्य वर्ष 2026 से प्रारम्भ होने की सम्भावना है। लेकिन कुछ सामाजिक संस्थाओं / व्यक्तियों द्वारा इस जन गणना के समय जाती एवं धर्म के नाम पर जैन समाज के सदस्यों द्वारा क्या जानकारी देनी है ?, इस पर मार्गदर्शन देना प्रारम्भ हो गया है। इनमें से बहुत सा मार्गदर्शन विरोधाभासी है। जैसे कि कुछ व्यक्तियों द्वारा जाती के कॉलम में "जैन" लिखने का आव्हान किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ व्यक्तियों द्वारा जाती के कॉलम में "जैन" नहीं लिखते हुए ओसवाल, पोरवाल, अग्रवाल, खंडेलवाल, हुमड, सैतवाल, कासार, चतुर्थ, पंचम, सराक आदि उपजाति लिखने का सुझाव दिया जा रहा है। यहाँ तक कि राष्ट्रीय संस्था JITO द्वारा जाती एवं धर्म, दोनों में जैन लिखने का सुझाव दिया जा रहा है | अतः इस तरह के मार्गदर्शनों से डर है कि कहीं गलत या विभिन्न जानकारी देने के कारण फिर से सही जानकारी नहीं दे पाने के कारण जैन समाज अपने अधिकारों से वंचित न रह जाएं !!!
यहाँ विशेषकर महाराष्ट्र एवं कर्नाटक राज्यों के जैन अनुयायियों के सन्दर्भ में "जैन अल्पसंख्यक एवं जैन ओबीसी" के बारे में जानना जरूरी है ।
महाराष्ट्र एवं कर्नाटक राज्यों के जैन अल्पसंख्यक एवं जैन ओबीसी जैन समाज के कुछ समूह ओबीसी की श्रेणी में आते हैं, जब कि पूरा जैन समाज अल्पसंख्यक की श्रेणी में आता है। ओबीसी और अल्पसंख्यक 2 अलग-अलग विषय हैं । लेकिन देखा गया है कि अधिकांश लोग इन दो अलग-अलग विषयों को मिला देते हैं । ओबीसी क्या है ? अल्पसंख्यक क्या है ? इन बातों को समझने लिये पहले आपको यह 2 अलग-अलग विषय हैं इस बात को ध्यान में रखना चाहिये, और इन दो विषयों को मिलाना नहीं चाहिये।
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अल्पसंख्यक क्या है ?
अल्पसंख्यक का दर्जा धार्मिक आधार पर दिया जाता है । भारत में हिंदू छोड़ कर बाकी सभी धार्मिक समुदाय जनसंख्या में अल्पसंख्यक हैं । इसलिये उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया है | यह दर्जा प्राप्त करनेवाले धार्मिक समुदाय इस प्रकार है :
- मुस्लिम / इसाई / सिख / पारसी / बौद्ध / जैन
जैसा कि उपर लिखा है, अल्पसंख्यक का दर्जा धार्मिक आधार पर दिया जाता है। यहां जाति का कोई संबंध नहीं है । अगर आप जैन हैं तो आपको हमेशा यह याद रखना होगा कि जैन एक धर्म है, न कि जाति। आपका जैन होना आपको मायनॉरिटी का दर्जा दिला देता है, चाहे आपकी जाति कोई भी हो ।
ओबीसी क्या है ?
ओबीसी का मतलब है Other Backward Caste, यह जाति पर आधारित है, न कि धर्म पर | जैन समाज की जो जातियां सामाजिक रूप से पिछड़ी हुई हैं, ऐसी कुछ जातियों को विशेषकर महाराष्ट्र एवं कर्नाटक सरकार द्वारा ओबीसी का दर्जा दिया गया है। ऐसी जातियों के लोग एक तरफ ओबीसी के लाभ पा सकते हैं, दुसरी तरफ मायनॉरिटी के लाभ भी पा सकते हैं । लेकिन यदि ऐसे व्यक्ति यदि जाती में जैन लिखेंगे, तो वे ओबीसी के लाभ से वंचित हो जायेंगे ।
ओबीसी के लाभ ओबीसी की सूचि में शामिल जातियों को दिये जाते हैं । उदाहरण के लिये कासार जाति को महाराष्ट्र में ओबीसी का दर्जा प्राप्त है । इस जाति का एक बडा समूह जैन धर्म का अनुयायी है । इन्हें जैन कासार नाम से जाना जाता है। चूंकि यह जैन हैं, इस जाति के लोग मायनॉरिटी के लाभ पा सकते हैं । और चूंकि यह कासार हैं, और कासार जाति ओबीसी की सूचि में शामिल है, इस जाति के लोग ओबीसी होने के लाभ भी पा सकते हैं। दूसरी तरफ जो कासार हिन्दू हैं, उन्हें OBC दर्जे के लाभ मिल सकेंगे, लेकिन मायनॉरिटी के लाभ नहीं मिल सकते ।
उपरोक्य भ्रामक स्थिति का निराकरण करने के लिए यह आवश्यक है कि सभी राष्ट्रिय सामाजिक / धार्मिक संस्थाएं एक साथ मिलकर सभी पंथों के आचार्यों के आशिर्वाद से एक राष्ट्रव्यापी मंथन का आयोजन करे ।
अतः JES जैन धर्मावलम्बियों एवं बुद्धिजीवियों की एक राष्ट्रीय संस्था होने के कारण उपरोक्त विषय की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए 20-21 दिसंबर, 2025 को जयपुर में होने वाले 18वें अधिवेशन के लिए "जातिगत जन-गणना एवं जैन समाज " विषय के बारे में विचार करने का निवेदन है ।
निवेदक,
ई.(डॉ.)प्रकाश जैन बड़जात्या, औंध, पुणे
अध्यक्ष : JESF धार्मिक स्थलों के दस्तावेज एवं अल्पसंख्यकों की सुविधाओं के बारे में जन-जागरूकता समिति (9850630326/pbarjatia@gmail.com)


सिर्फ जैन कासार ही नहीं सैतवाल और जैनो की अन्य कई जातीया ओबीसी में आती है.
ReplyDeleteजी, यह तथ्य भलीभाँति से ज्ञात है। लेखक ने शायद कुछ कारणों से यहाँ स्थान नहीं दिया। क्योंकि एक लेख में समस्त जानकारी सांझा करना सँभव नहीं। सम्पूर्ण देश में अनेकों जातियाँ हैं जो जैन धर्म संस्कृति का पालन करती हैं और उनकी जाति SC ST OBC की श्रेणी में मान्यता प्राप्त हैं।
ReplyDeleteJains me koi sc st. Nahi hai.
DeleteMaharashtra state gazzate me Jain Panchamrit, Kasar, Shetwal inhe OBC me liya hai. Anjaneme bhi SC., ST. Jain mai hai aisa mat kehena. Sabhi Jain financially strong nahi hai kuch logonki financial conditon middle class aur poor bhi hai. To unhe govt. Facility nahi milani chahiye?
Delete9850777659
ReplyDeleteकुछ लिखा नहीं है केवल cell नंबर क्यों ?
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