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जागो जैन दानवीरों, जागो।

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 *जैन समाज के सभी दानवीरों को जय जिनेन्द्र…* ✒️✒️✒️ *यह संदेश आप सभी के लिए एक *रेड अलर्ट है…** *जागो जैन दानवीरों, जागो।* ₹1000 से लेकर ₹10 करोड़ तक की बोली बोलने वाले सभी जैन भाइयों से विनम्र निवेदन है—बहुत गहराई से सोचिए और विवेक के साथ निर्णय लीजिए। यदि यही धन जैन युवाओं को *बिना ब्याज के ऋण* के रूप में देकर वापस लिया जाए, तो पूरा परिवार सम्मानपूर्वक आगे बढ़ सकता है। या फिर *जैन कॉलोनी* बनाकर साधार्मिक परिवारों को एक कमरा-रसोई उपलब्ध कराइए, या *जैन वाड़ी, **जैन अस्पताल* बनवाइए—पुण्य निश्चित रूप से मिलेगा। आज हमारे समाज में लगभग *60% लोग मध्यम या कमजोर आर्थिक स्थिति* में हैं। यदि समाज को समुद्र बनाना है, तो *साधारण साधार्मिक का हाथ पकड़ना ही पड़ेगा*। आज *लाखों जैन युवा* अपने परिवार को आगे बढ़ाने और पढ़ाई के लिए किसी सहारे का हाथ थामने की प्रतीक्षा में खड़े हैं। आज *हज़ारों बहनें-माताएँ* हैं जो खाखरा-पापड़ बनाकर, फेरी लगाकर, या कठोर मजदूरी करके अपना जीवन चला रही हैं। आज की परिस्थितियों में *साधु-संतों में जागरूकता की आवश्यकता है*। आप जैसे समझदार लोगों को अधिक समझाने की आवश्यकता न...

यह परिवर्तन

  मैं जितने साल जी चुका हूँ, उससे अब कम साल मुझे जीना है। यह समझ आने के बाद मुझमें यह परिवर्तन आया है : १. किसी प्रियजन की विदाई से अब मैं रोना छोड़ चुका हूँ क्योंकि आज नहीं तो कल मेरी बारी है। २. उसी प्रकार,अगर मेरी विदाई अचानक हो जाती है, तो मेरे बाद लोगों का क्या होगा, यह सोचना भी छोड़ दिया है क्योंकि मेरे जाने के बाद कोई भूखा नहीं रहेगा और मेरी संपत्ति को कोई छोड़ने या दान करने की ज़रूरत नहीं है। ३. सामने वाले व्यक्ति के पैसे, पावर और पोजीशन से अब मैं डरता नहीं हूँ। ४. खुद के लिए सबसे अधिक समय निकालता हूँ। मान लिया है कि दुनिया मेरे कंधों पर टिकी नहीं है। मेरे बिना कुछ रुकने वाला नहीं है। ५. छोटे व्यापारियों और फेरीवालों के साथ मोल-भाव करना बंद कर दिया है। कभी-कभी जानता हूँ कि मैं ठगा जा रहा हूँ, फिर भी हँसते-मुस्कुराते चला जाता हूँ। ६. कबाड़ उठाने वालों को फटी या खाली तेल की डिब्बी वैसे ही दे देता हूँ, पच्चीस-पचास रुपये खर्च करता हूँl जब उनके चेहरे पर लाखों मिलने की खुशी देखता हूँ तो खुश हो जाता हूँ। ७. सड़क पर व्यापार करने वालों से कभी-कभी बेकार की चीज़ भी खरीद लेता हूँ। ८. ब...