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आओ पक्षियों से कुछ सीखें

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१. रात को कुछ नही खाते।🦜 २. रात को घूमते नही।🦜 ३. अपने बच्चे को सही समय पर सिखाते हैं।🦜 ४. ठूस ठूस के कभी नही खाते। आप ने कितने भी दाने डाले हों, थोड़ा खा के उड़ जायेंगे। साथ कुछ नही ले जाते।🦜 ५. रात होते ही सो जायेंगे, सुबह जल्दी जाग जायेंगे, गाते चहकते उठेंगे।🦜 ६. अपना आहार कभी नहीं बदलते।🦜 ८. अपने शरीर से सतत् काम लेते हैं। रात के सिवा आराम नही।🦜 ९. बीमारी आई तो खाना छोड़ देंगे, तभी खायेंगे जब ठीक होंगे।🦜 १०. अपने बच्चे को भरपूर प्यार देंगे।🦜 ११. परिश्रम करने से हृदय, किडनी, लिवर के रोग नहीं होते।🦜 १२. प्रकृति से उतना ही लेते हैं जितनी जरूरत है।🦜 १३. अपना घर पर्यावरण अनुकूल बनाते हैं।🦜 १४. अपनी भाषा छोड़कर दूसरों की बोली नहीं बोलते।🦜 *बहुत ही शिक्षाप्रद !* *हम भी इनसे कुछ सीखें तो जीवन सरल, सुंदर व सफल हो जाए*

क्या ये ही जिन्दगी है ?

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जीवन के *23* साल हवा की तरह उड़ गए । फिर शुरू हुई *नोकरी* की खोज । ये नहीं वो, दूर नहीं पास । ऐसा करते करते *2 .. 3* नौकरियाँ छोड़ने एक तय हुई। थोड़ी स्थिरता की शुरुआत हुई। फिर हाथ आई पहली तनख्वाह । वह *बैंक* में जमा हई और शुरू हुआ अकाउंट में जमा होने वाले *शून्यों* का अंतहीन खेल। *2- 3* वर्ष और निकल गए। बैंक में थोड़े और *शून्य* बढ़ गए। उम्र *27* हो गयी। और फिर *विवाह* हो गया। जीवन की *राम कहानी* शुरू हो गयी। शुरू के *2 ..  4* साल नर्म , गुलाबी, रसीले , सुनहरे गुजरे। हाथों में हाथ डालकर घूमना फिरना, रंग बिरंगे सपने। *पर ये दिन जल्दी ही उड़ गए*। और फिर *बच्चे* के आने ही आहट हुई। वर्ष भर में *पालना* झूलने लगा। अब दोनों का सारा ध्यान बच्चे पर केन्द्रित हो गया। उठना - बैठना, खाना - पीना, लाड़ - दुलार । समय कैसे फटाफट निकल गया, पता ही नहीं चला। *इस बीच कब मेरा हाथ उसके हाथ से निकल गया, बाते- करना घूमना - फिरना कब बंद हो गया दोनों को पता ही न चला*। बच्चे* बड़े होते गये । वो *बच्चों* में व्यस्त हो गयी, मैं अपने *काम* में । घर और गाड़ी की *क़िस्त*, बच्चों की जिम्मेदारी, शिक्षा और भविष्य क...

पाप ले लो पुण्य दे दो।

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किसी आश्रम में एक साधु रहता था। काफी सालों से वह इसी आश्रम में रह रहा था। अब वह  काफी वृद्ध हो चला  था और  मृत्यु को वह  निकट महसूस कर रहा था , लेकिन संतुष्ट था कि 30 साल से उसने  प्रभु का सिमरन किया है, उसके खाते में ढेर सारा पुण्य जमा है इसलिए उसे मोक्ष मिलना तो तय ही है।  एक दिन उसके ख्याल  में एक स्त्री आयी। स्त्री ने साधु से कहा -  "अपने एक दिन के पुण्य मुझे दे दो और मेरे एक दिन के पाप तुम वरण कर लो।"  इतना कह कर स्त्री लोप  हो गयी।  साधु बहुत बेचैन हुआ कि इतने बरस तो स्त्री ख्याल में ना आयी, अब जब अंत नजदीक है तो स्त्री ख्याल में आने लगी।   फिर उसने ख्याल झटक दिया और प्रभु सुमिरन में बैठ गया।  स्त्री फिर से ख्याल में आयी। फिर से उसने कहा कि  "एक दिन का पुण्य मुझे  दे दो और मेरा एक दिन का पाप तुम वरण कर लो।" इस बार साधु ने स्त्री को पहचानने की कोशिश की लेकिन स्त्री का चेहरा बहुत धुंधला था, साधु से पहचाना नहीं गया! साधु अब चिंतित हो उठा कि एक दिन का पुण्य लेकर यह स्त्री क्या करेगी! हो ना हो ये स्त्री कष्ट में...

परमात्मा प्राप्ति किसे होती है?

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एक राजा था। वह बहुत न्याय प्रिय तथा प्रजा वत्सल एवं धार्मिक स्वभाव का था। वह नित्य अपने इष्ट देव को बडी श्रद्धा से पूजा-पाठ और याद करता था। एक दिन इष्ट देव ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिये तथा कहा- "राजन् मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूं। बोलो तुम्हारी  कोई इचछा है?" प्रजा को चाहने वाला राजा बोला- "भगवन् मेरे पास आपका दिया सब कुछ है। आपकी कृपा से राज्य में सब प्रकार सुख-शान्ति है। फिर भी मेरी एक इच्छा है कि जैसे आपने मुझे दर्शन देकर धन्य किया, वैसे ही मेरी सारी प्रजा को भी दर्शन दीजिये।" "यह तो सम्भव नहीं  है।" भगवान ने राजा को समझाया, परन्तु प्रजा को चाहने वाला राजा भगवान् से ज़िद्द करने लगा। आखिर भगवान को अपने साधक के सामने झुकना पड़ा और वे बोले- "ठीक है, कल अपनी सारी प्रजा को उस पहाड़ी के पास लाना। मैं पहाड़ी के ऊपर से दर्शन दूँगा।" राजा अत्यन्त प्रसन्न हुईं और भगवान को धन्यवाद दिया। अगले दिन सारे नगर मे ढिंढोरा पिटवा दिया कि कल सभी पहाड़ के नीचे मेरे साथ पहुँचें, वहाँ भगवान् आप सबको दर्शन देंगे । दूसरे दिन राजा अपने समस्त प्रजा और स्वजनों को साथ लेकर...

ये तड़क ये भड़क, कयूं कर रहे हो शादी? कभी पूछा अपने मन से?

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इस विषय पर बहुत कहा जा चुका है, पर व्यक्ति समझ नहीं पा रहा है, लड़का हो या लड़की, या उनके माता-पिता। इन्हीं के चारों तरफ़ ये शादी की कहानी घूमती है। हम देख रहे हैं लव मैरिज करो या रिलेशनसिप में रहो फिर भी शादी टूट जाती है। आख़िर क्यों व्यक्ति की संवेदनाएँ समाप्त हो गई हैं एक दूसरे के प्रति जबकि संवेदनाओं के बिना रिश्ते नहीं चलते हैं। शादी करने से पहले समझें सामने वाले को। किसी के दबाव में आके कभी शादी नहीं करो, जो बाद में इतना भयानक अंजाम न हो जिससे आत्मा कराह उठे, एक पल तो ठहर कर सोचो हमें क्या चाहिए? सच पूछो तो आज वासना अय्याशी इतनी हावी हो गई है और साथ में धन का लालच, जो प्रकृति के विरूद्ध कार्य हो रहे हैं, कहीं लड़की को मार दिया जा रहा है कहीं लड़के को, मतलब तुम्हारी अय्याशी में जो भी ख़लल डालेगा उसी को मौत के घाट उतार दो, क्या उससे जीवन सुख शांति से व्यतीत होगा? एक ग़लत निर्णय से दो परिवारों का जीवन नरक मय हो जाता है। आज लड़कियाँ स्वतंत्र होकर पढ़ लिख कर पैसा कमा रहा ही हैं पर उसका दुरुपयोग क्यों ? लड़कियों को सफल बनाने के लिए पढ़ाई पर ज़ोर दिया गया था, क्या यही सफल होना है, घर को...

क्यों है भारतीय बुजुर्गों की चिंतजनाक स्थिति?

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  आम शिक्षित भारतीय नागरिक की गुहार, “क्यों है भारतीय बुजुर्गों की चिंतजनाक स्थिति” ।  सरकार को 65 साल से ज़्यादा उम्र के सभी बुजुर्गों पर ध्यान क्यों देने को तैयार नहीं है ?  “क्या भारत में बुजुर्ग होना अपराध है? भारत में 70 साल के बाद बुजुर्ग मेडिकल इंश्योरेंस के लिए योग्य नहीं हैं, उन्हें EMI पर लोन नहीं मिलता। ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिया जाता। उन्हें कोई काम नहीं दिया जाता, इसलिए वे जीने के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं। उन्होंने रिटायरमेंट की उम्र यानी 60-65 साल तक सभी टैक्स, इंश्योरेंस प्रीमियम भरे थे। अब बुजुर्ग होने के बाद भी उन्हें सभी टैक्स देने पड़ते हैं। भारत में बुजुर्गों के लिए कोई योजना नहीं है। रेल/हवाई यात्रा पर 50% छूट भी बंद कर दी गई है। तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि राजनीति में बुजुर्गों को विधायकों, सांसदों या मंत्रियों को मिलने वाले सभी फायदे दिए जाते हैं और उन्हें पेंशन भी मिलती है। समझ नहीं आता कि बाकी सभी (कुछ सरकारी कर्मचारियों को छोड़कर) को यही सुविधाएं क्यों नहीं दी जातीं। सोचिए, अगर उनका ख्याल नहीं रखा गया तो कहाँ जाएँगे। अगर देश के बुजुर्ग चु...

BOOK REVIEW ON "HARAPPA AND JAINISM" | English | T. N. RAMACHANDRAN | Former ASI Director General |

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  The opinion and questions on the subject, Antiquity of Jainism, is often a consistent topic of debate & research within India and across the globe, among enthusiasts & academics in the field of history and archaeology. The general world society believes in two theories of evidence & explanations: i) The resources stated in the Jain and Vaidik (Hindu ) canonicals, including other religious texts, ii) The archaeological facts unearthed through excavations and explained philosophically. The Jain community in India has all the legitimate and valid resources, under both the theories stated above. But, still a high percentage of native Indian population have very doubtful levels concerning the antiquity of jainism or how old is Sraman Dharm (jain religion). High respect is often given to archaeologists working in the field of history & culture. As it's based on physical evidence. The book titled Harappa & Jainism, has been written & authored by a reputed archae...

भारतीय सकल जैन धर्म की जातियां

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अरसु (कर्णाटक) असाटी अग्रवाल (हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और भारत के अन्य काई राज्य) इंद्र (तटीय कर्णाटक) बंट (तटीय कर्णाटक) बघेरवाल/लाड (राजस्थान, विदर्भ-महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश) बोगार (कर्णाटक) भावसार (गुजरात) भाभडा (पंजाब) भोजक चरनगारे चतुर्थ (कर्णाटक, महाराष्ट्र) चिप्पिगा (कर्णाटक) चित्तौड़ा (राजस्थान) धर्मपाल (राजस्थान, मध्य प्रदेश) धाकड (विदर्भ-महाराष्ट्र) गंगेरवाल (पश्चिम विदर्भ-महाराष्ट्र) गोलसिंघारे (बुंदेलखंड-मध्य प्रदेश) गोलापूर्व (बुंदेलखंड-मध्य प्रदेश) गोलालारे (बुंदेलखंड-मध्य प्रदेश) गुरव (कोंकण-महाराष्ट्र) घांची (गुजरात,राजस्थान) हंबड/हुमड(गुजरात,राजस्थान, महाराष्ट्र) जैन ब्राह्मण(दक्षिण कर्णाटक) जैसवाल कच्छी ओसवाल (कच्छ-गुजरात) कंदोई कासार (महाराष्ट्र) कोष्टी/जैन कोष्टी(विदर्भ-महाराष्ट्र) कांबोज (कर्णाटक, महाराष्ट्र) कुरुबा/कुरुंब (कर्णाटक) खरौआ (भदावर-मध्य प्रदेश) खंडेलवाल (राजस्थान, मध्य प्रदेश) लमेचू (मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश) मेवाडा (राजस्थान) मीणा (राजस्थान) नवनात (केनिया-आफ्रिका, इंग्लंड) नागदा (राजस्थान) नेमा (मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान) नैनार (तमिल नाडु) नाडावर...

जिसकी लाठी उसकी भैंस Might is Right : धार्मिक स्थलों की सुरक्षा

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प्राचीन काल से ही नहीं, बल्कि आज भी का सञ्चालन उक्त युक्ति के आधार पर ही हो रहा है । लेकिन दुर्भाग्य से हम जैनी लोग अभी भी अपने सपनों में ही डुबे हुए हैं !!! हमें आने वाले खतरे नजर नहीं आ रहे हैं ??? गत कुछ माह पूर्व ही वीले पार्ले, मुंबई के जिन-मंदिर को कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा सुनियोजित षड्यंत्र द्वारा अन्यायपूर्ण तरीके से तोड़े जाने एवं 02 जुलाई,2025 को गिरनारजी की सामूहिक यात्रा के समय, हमारा अपना तीर्थ क्षेत्र होने पर भी कितनी प्रतिबंधता एवं कठिनाइयों के बीच हम यात्रा कर सके ???, यह सब इस बात का प्रमाण है कि जब तक हम संगठित होकर अपने अधिकारों के प्रति जागृत नहीं होंगे, तब तक निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा नियोजित षड्यंत्रों द्वारा हमारी कमजोरी का फायदा उठाया जाता रहेगा। तो हमें यह समझना होगा कि प्रश्न चाहे गिरनारजी का हो, या शिखरजी का या पालीताना का ? ? ? अंतरिक्ष पार्श्वनाथ का या कुण्डल का ??? श्वेताम्बर का या दिगंबर का ??? तेरा पंथ का या बीस पंथ का ??? हमें सभी भेद भाव भुलाकर संगठित होकर संकीर्णता छोड़कर अपने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए सजग होना पड़ेगा। धार्मिक स्थल रहेंगे ...

लेख: कर्नाटक एवं महाराष्ट्र के जैन OBC एवं जातिगत जन गणना

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.. 1 ... युवावस्था से ही लगभग 35 वर्षों से सामाजिक कार्यों में रूचि होने के कारण पुणे (महाराष्ट्र) की स्थानीय संस्थाओं के साथ ही राष्ट्रिय संस्थाओं जैसे दिगंबर जैन महासमिति, दिगंबर जैन महासभा, जैन इंजीनियर्स' सोसाइटी आदि में भी सक्रीय रूप से कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । इस समय ऐसा आभास हुआ कि राष्ट्रिय संस्थाओं के सभी, विशेषकर उत्तर भारत के लगभग सभी वरिष्ठ कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों में अनभिज्ञनता के कारण यह धारणा बनी हुई है कि जैन धर्मानुयायी सिर्फ ओसवाल, पोरवाल, खंडेलवाल, अग्रवाल, हुमड़, पोरवाड़, परवार आदि उपजातियों तक ही सिमित हैं । जब कि तथ्य यह है कि जैन धर्म जन्म से नहीं बल्कि कर्म से जुड़ा हुआ है। अतः जो जैन धर्म के सिद्धांतो को मानता है एवं उसके अनुसार आचरण करता है, वही सच्चा जैनी है । इस सिद्धांत के अनुसार दक्षिण भारत विशेषकर महाराष्ट्र एवं कर्नाटक राज्य के कुछ जिलों के सम्पूर्ण गावों के निवासी जैन धर्मानुयायी हैं । लेकिन वे उपरोक्त किसी भी उपजाति से सम्बन्ध नहीं रखते हैं, बल्कि चतुर्थ या पंचम कहलाते हैं । ये सभी अधिकतर कृषि करते हैं या गांव की जरुरत के अनुसार वि...